परिचय:दिल्ली के लाल किला धमाके (Red Fort Blast) के बाद पूरा देश एक बार फिर सुरक्षा के मसले पर सजग हो गया। धमाके के तुरंत बाद जहां दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियाँ सक्रिय हुईं, वहीं उत्तर प्रदेश (UP) में भी प्रशासन ने ताबड़तोड़ एक्शन शुरू कर दिया। यूपी, जो दिल्ली से सटा हुआ राज्य है, हमेशा से ही सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में धमाके के बाद यूपी में उठाए गए कदमों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि राज्य सरकार किसी भी खतरे को हल्के में नहीं ले रही है।

धमाके के बाद यूपी में सतर्कता बढ़ी
दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला परिसर में हुए धमाके की खबर मिलते ही यूपी पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया। सभी जिलों को तत्काल सतर्क रहने के निर्देश दिए गए। खास तौर पर दिल्ली से सटे जिलों — गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ, बागपत और बुलंदशहर में सुरक्षा घेरा मजबूत कर दिया गया। रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और प्रमुख बाज़ारों में बम डिस्पोजल स्क्वाड और डॉग स्क्वाड की टीमें तैनात की गईं।लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज जैसे बड़े शहरों में भी पुलिस ने रूट पेट्रोलिंग बढ़ाई। थाना स्तर पर अधिकारियों को आदेश दिया गया कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की तुरंत जानकारी स्थानीय इंटेलिजेंस यूनिट को दी जाए।
खुफिया एजेंसियों की साझा कार्रवाई
इस बार यूपी पुलिस अकेले काम नहीं कर रही थी। धमाके के बाद ATS (Anti Terrorist Squad), NIA (National Investigation Agency), और IB (Intelligence Bureau) ने संयुक्त जांच अभियान शुरू किया। यूपी में कई जगहों पर रेड की गई, जिसमें संदिग्ध लोगों से पूछताछ और डाटा खंगाला गया।सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियों ने दिल्ली धमाके में इस्तेमाल हुए नेटवर्क के संभावित लिंक यूपी के कुछ शहरों तक खोजे। लखनऊ, कानपुर और आजमगढ़ जैसे इलाकों में जांच तेज की गई क्योंकि इन क्षेत्रों से पहले भी आतंकी कनेक्शन मिलने की आशंका जताई जाती रही है।

सोशल मीडिया और ऑनलाइन निगरानी
धमाके के बाद सिर्फ ज़मीनी नहीं, बल्कि डिजिटल निगरानी भी बढ़ा दी गई। साइबर सेल को निर्देश दिया गया कि सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों और भड़काऊ पोस्ट्स पर नजर रखी जाए। यूपी पुलिस की आईटी टीम ने फेसबुक, एक्स (ट्विटर) और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सक्रियता बढ़ाई ताकि कोई व्यक्ति या संगठन स्थिति का गलत फायदा न उठा सके।यूपी में “ऑनलाइन सर्विलांस यूनिट” ने कई खातों को चिन्हित किया जो संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े पाए गए। इन पर न सिर्फ नजर रखी गई बल्कि कई मामलों में कानूनी कार्रवाई भी शुरू हुई।सरकार और पुलिस ने जनता से भी अपील की कि अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध चीज़ की जानकारी तुरंत 112 या स्थानीय थाने को दें। इसके बाद कई जिलों में “जन-जागरूकता अभियान” चलाया गया। स्कूल, कॉलेज और सामुदायिक केंद्रों में सेमिनार कर लोगों को बताया गया कि सुरक्षा सिर्फ पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का फर्ज है।लोगों ने भी प्रशासन का साथ दिया। कुछ जगहों पर स्थानीय लोगों की सूचना पर संदिग्ध बैग या वस्तुएँ बरामद हुईं, जिन्हें बाद में जांच में सुरक्षित पाया गया। लेकिन इन घटनाओं ने साबित किया कि जनता अब ज्यादा सजग हो गई है।

सीमाई इलाकों पर कड़ी निगरानी
उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से की सीमाएँ हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड से लगती हैं। धमाके के बाद इन इंटर-स्टेट बॉर्डर्स पर सख्त निगरानी रखी गई। चेकपोस्ट पर हर वाहन की तलाशी ली गई, खासकर उन गाड़ियों की जो दिल्ली से यूपी की तरफ जा रही थीं। ATS ने कुछ संदिग्ध वाहनों की लिस्ट तैयार की और हाईवे पेट्रोलिंग टीमों को साझा की। साथ ही, ड्रोन सर्विलांस के जरिए भी संवेदनशील इलाकों पर नजर रखी गई।
राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
धमाके के बाद यूपी के मुख्यमंत्री ने एक आपात बैठक बुलाई, जिसमें DGP, गृह सचिव और खुफिया विभाग के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा —“ राज्य की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी कीमत पर शांति और व्यवस्था से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।” इसके बाद राज्यभर में “ ऑपरेशन शांति मिशन” चलाया गया, जिसके तहत 72 घंटों तक लगातार तलाशी अभियान चला। इसमें अवैध हथियार, संदिग्ध फोन कॉल्स और बाहरी लोगों की लिस्ट तैयार की गई।

निष्कर्ष
दिल्ली के लाल किला धमाके ने देश को एक बार फिर याद दिलाया कि सुरक्षा कभी भी हल्के में नहीं ली जा सकती। लेकिन इस बार जो फर्क दिखा, वह था — तेज और समन्वित एक्शन। यूपी ने यह साबित किया कि अगर इरादा मजबूत हो, तो कोई भी संकट बड़ा नहीं होता।राज्य की एजेंसियों ने यह संदेश दिया है कि चाहे आतंक की छाया कितनी भी गहरी क्यों न हो, एकजुटता और जागरूकता से हर खतरे का सामना किया जा सकता है।








